औसधीय, तिलहनी, दलहनी व अमरूद का बुआई समय

Rate this post

औसधीय व सुगंध पौधों के लिए बुआई समय तथा बीज दर

फसल बुआई का सही समय रोपाई का सही समय बीज की मात्रा
खस जुलाई से अगस्‍त और फरवरी से मार्च
रोशा घास Rocha grass

 

मई 2.5 kg/ha
नींबू घास Lemon Grass

 

मई 4-5 kg/ha
ईसबगोल Isabgol (Plantago ovata Forsk.) November 20 to December 20 4 kg/ha in 0.25-0.50 cm depth
अफीम पोस्ता Opium poppy (Papaver somniferum Linn.) first fortnight of November 6-7 kg /ha
सनाय Senna (Cassia angustifolia Vahl) June-July 70-75 thousand plants / ha
सफेद मूसली Safed musli (Chlorophytum spp Ker.) middle of June 2.5 – 3.0 q roots /ha
शर्पगंघा Sarpagandha (Rauvolfia serpentina Beth. ex Kurz) end of April
अश्‍वगंधा Aswagandha (Withania somnifera Danunal) 2nd or 3rd week of August 20-35 kg/ha
पुदीना Mints (Mentha spp) 1st week of Feb. – 2nd week of March 450-500 kg suckers /ha

तिलहनी फसलों का बुआई समय

फसल

(crop)

बुआई का सही समय

(Sowing time)

बीज की मात्रा (किग्रा/हैक्‍ट)

Seed rate (kg/ha)

राई या सरसों (Rai/ Raya/ Indian mustard/ Brown mustard/ Laha) 30 सितंबर से 15 अक्‍तुबर 5-6
तोरिया/ लाही/ लहिया (Toria/ Lahi) 1 सितंबर से 15 सितंबर 4-5
सरसों (पीली, भूरी) (Yellow sarson, Brown sarson) 25 सितंबर से 15 अक्‍तुबर 5-6
तारामीरा (Taramira/ Rocket salad) अक्‍तूबर 5-6
तिल (Sesamum/ Sesame) जून – जुलाई (खरीफ) 3-5
मूंगफली (Ground nut) मध्‍य जून – जुलाई 70-75
अलसी (Linseed) अक्‍तूबर से नवम्‍बर 30-40
सोयाबीन (Soybean) मध्‍य जून से मध्‍य जुलाई 70 से 75
अरण्‍डी (Castor) 15 जून से मध्‍य जुलाई 15
सूरजमुखी (Sunflower) बसंत: 20 फरवरी से 10 मार्च,

खरीफ: जुलाई से अगस्‍त आरम्‍भ,

रबी: नवम्‍बर

 

6 से 7 संकर किस्‍में

दालों या दलहनी फसलों का बुआई समय

फसल (crop) बुआई का सही समय (Sowing time) रोपाई का सही समय (Transplantingtime) बीज की मात्रा (किग्रा/हैक्‍ट) Seed rate (kg/ha)
चना (Gram/ Chickpea) असिचित-15 से 20 अक्‍तुबर तक

सिंचित-15 नवम्‍बर

सिचित क्षेत्र: 60 सामान्‍य दानो वाली व 75 मोटे दाने वाली किस्‍मे

बारानी क्षेत्र: 75 सामान्‍य दानो वाली व 100 मोटे दानो वाली किस्‍में

मटर (Peas) मध्‍य अक्‍तुबर से मध्‍य नवम्‍बर 80 से 100
मसूर (Lentil) मध्‍य अक्‍तुबर से मध्‍य नवम्‍बर 40-60
मूंग (Mungbean) बसन्‍त: फरवरी अंत तक

ग्रीष्‍म: मध्‍य अप्रैल तक

खरीफ: जुलाई में

25-30 (बसन्‍त/ग्रीष्‍म) 12-15 (खरीफ)
उडद या उर्द (Urdbean) बसन्‍त: फरवरी में

ग्रीष्‍म: मार्च से अप्रैल


खरीफ: जुलाई में
25-30 (बसन्‍त/ग्रीष्‍म) 12-15 (खरीफ)

अरहर (Pigeonpea/ Redgram/ Tur)

बसन्‍त: फरवरी

खरीफ: जून – जुलाई

 

12-15

लोबिया (Cowpea)

बसन्‍त: फरवरी अंत तक

ग्रीष्‍म: मध्‍य अप्रैल तक

खरीफ: जुलाई में

30-40

सोयाबीन (Soybean)

मध्‍य जून से मध्‍य जुलाई

70 से 75

भारत में अमरूद के फूल देने और फलने का समय

अमरूद के पेड़ प्राकृतिक परिस्थितियों के अंतर्गत उत्तरी भारत में साल में दो बार लेकिन पश्चिमी और दक्षिणी भारत में साल भर में तीन बार अर्थात साल भर फूलों और फलों का उत्पादन करते हैं परिणामस्वरूप यह विराम अवधि (rest period) में चला जाता है और अंततः साल के अलग-अलग समय पर छोटे फसल देने लगते हैं,

फूल और फल देने की यह पद्धति व्यावसायिक खेती के लिए वांछनीय नहीं है । अच्छी तरह से परिभाषित अवधि हैं:

फूलों के प्रकार

फूल देने का समय कटाई का समय

फलों की गुणवत्ता

अम्बे बहार फरवरी-मार्च

(वसंत ऋतु)

 

जुलाई-सितम्बर

(वर्षा ऋतु)

फीका, पानी जैसा, स्वाद और रखने की गुणवत्ता खराब
मृग बहार जून-जुलाई


(मानसून ऋतु)
नवम्बर-जनवरी

(शरद ऋतु)

उत्कृष्ट*
हस्त बहार** अक्टूबर फरवरी-अप्रैल बढ़िया, लेकिन उपज कम, अच्छी कीमत मिलती है

*अमरूद के पेड़ केवल मृग बहार फूलों का उत्पादन करने के लिए बनाये गए हैं ।
**यह प्रकार सामान्य नहीं है । यह प्रवृत करना आसान है । यह ज्यादातर एक मौका फसल है । यह पश्चिमी और दक्षिणी भारत में देखा जाता है ।

मृग बहार के लिए अमरूद में फूल, फल लगने को नियन्त्रि‍त करने की वि‍धि‍:

भारत भर में, मृग बहार अम्बे बहार और हस्त बहार से अधिक पसंद किए जाते हैं । इसलिए, फूलों का नियंत्रण आवश्यक हो जाता है ताकि मृग बहार अत्यधिक फूलों का उत्पादन कर सके और सर्दियों में फल उपलब्ध सके ।

इस उद्देश्य के लिए निम्नलिखित कार्य-विधि अपनाया जाता है:

क) अमरूद में सिंचाई पानी को प्रतिबंधित करने के लिए उपाय:

अमरूद के पेड़ो को फरवरी से मई के मध्य तक सिंचाई नहीं दी जानी चाहिए। इस प्रकार पेड़ गर्मी के मौसम (अप्रैल-मई) के दौरान अपने पत्ते गिरा कर आराम करने के लिए चले जाते हैं। इस दौरान, वृक्ष अपनी शाखाओं में खाद्य सामग्री संरक्षण कर सकते हैं।

जून के महीने में पेड़ों (खेत) की अच्छी तरह से जुताई करने और खाद देने के बाद सिंचाई की जाती है। 25-25 दिनों के बाद पेड़ में विपुल मात्रा में फूल निकलते हैं । सर्दियों के दौरान फल परिपक्व हो जाते हैं ।

ख) अमरूद जड़ों को अनावृत करने के लिए:

जड़ों को सूर्य-प्रकाश देने के लिए लिए धड़ (45-60 सेमी त्रिज्या) के आसपास ऊपरी मिट्टी को सावधानी से निकाल दिया जाता है। इस क्रिया से मिट्टी की नमी की आपूर्ति में कमी हो जाती है परिणामस्वरूप पत्तियाँ गिरने लगती है और पेड़ आराम करने के लिए चला जाता है।

3-4 सप्ताह के बाद, उजागर जड़ों को मिट्टी के द्वारा फिर से ढक दिया जाता है। इसके बाद खाद और पानी दिया जाता है।

ग) फूल खि‍लने से रोकने के लिए:

यह वृद्धि नियामकों के उपयोग से प्रभावी हो सकता है जैसे कि 50 ppm (मिलियन प्रति भागों) की दर से नेफ़थलीन एसीटामाइड (Naphthalene Acetamide) (NAD) का उपयोग किया जा सकता है। यह छोटे पैमाने पर हाथ से भी किया जा सकता है।

जब अम्बे बहार के फूलों को खिलने से रोक दिया जाता है तो पेड़ मृग बहार में अधिक फूलों और फलों के उत्पादन के लिए अधिक सक्षम हो जाता है।

घ) पेड़ों को झुकाना:

जिस पेड़ कि शाखाएँ सीधी होती हैं बहुत कम फल देने वाली होती है ऐसे पेड़ कि शाखाओं को झुका कर जमीन पर गड़े खूंटे से बांधा जा सकता है । इस प्रकार निष्क्रिय कलियाँ भी सक्रिय हो जाती हैं और फूल और फल देने लग जाती हैं।

ङ) वृद्धि नियामकों का उपयोग:

सर्दियों की फसल मानसून फसल की तुलना में गुणवत्ता में काफी बेहतर होते हैं। किसान अक्सर एक उच्च कीमत पाने के लिए फूलों को गिरा कर मानसून फसल को कम कर देते हैं। यह फूलों के वसंत फ्लश पर Maleic hydrazide जैसे वृद्धि नियामकों के उपयोग द्वारा किया जाता है। वृद्धि नियामकों जैसे NAA, NAD और 2,4 D का उपयोग फूलों के कम होने और फसल के मौसम की जोड़-तोड़ करने में भी प्रभावी होना पाया गया है।

भारत के विभिन्न हिस्से में फूल देने की मुख्य अवधि :

पूर्वी भारत क)अप्रैल-मई
ख) सितम्बर-अक्टूबर
पश्चिमी भारत क)फरबरी-मार्च
ख) जून-जुलाई
ग) अक्टूबर-नवम्बर
उत्तरी भारत क)अप्रैल-मई
ख) अगस्त-सितम्बर
दक्षिणी भारत क)अप्रैल-मई
ख) अगस्त-सितम्बर
ग) अक्टूबर-नवम्बर

 

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

आप हमसे निम्न प्रकार से जुड़ सकते हैं –

  • किसान सलाहकार के रूप में 
  • कृषि विशेषज्ञ के रूप में 
  • अपने क्षेत्र के मंडी भाव उपलब्ध करवाने के रूप में  
  • कृषि ब्लॉग लेखक के रुप में 

अगर अप उपरोक्त में से किसी एक रूप में हमसे जुड़ना चाहते हैं तो 👇👇👇

सोशल मीडिया पर हमसे जरूर जुड़े 👇👇👇

JOIN OUR TELEGRAM                                JOIN OUR FACEBOOK PAGE

Leave a Comment

error: Content is protected !!